शेर-ओ-शायरी

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पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी,
डगमगाना भी जरूरी है संभलने के लिए।

-'वामिक' जौनपुरी
 

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पी शौक से वाइज अरे क्या बात है डर की,
दोजख तेरे कब्जे में है, जन्नत तेरे घर की।

-'शकील' बदायुनी


1.वाइज - पीर, गुरू, धर्माचार्य 2.दोजख - नरक

 

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पीते-पीते जब भी आया तेरी आंखों का खयाल,
मैंने अपने हाथ से तोड़े हैं पैमाने बहुत।

-हुनर 'टौंकी'


1.पैमाना - पियाला


पूछिए मैकशों से लुत्फे-शराब,
यह मजा पाकबाज क्या जाने।

-मिर्जा 'दाग'


1.मैकश - शराबी

2.पाकबाज - जो शराब आदि से पूर्ण रूप से परहेज करता है

 

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