शेर-ओ-शायरी

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मुद्दत से मैकदे में 'अदम' मैं नहीं गया,
दुनिया को ऐतबार न आए तो क्या करूं।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. मैकदा - शराबखाना
 

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मुद्दत हुई है यार को मेहमां किये हुए,
जोशे-कदह से बज्मे-चरागाँ किये हुए।

-मिर्जा गालिब


1.कदह - शराब पीने का जाम, पान-पात्र, सागर
2.बज्मे-चरागाँ - महफिल को चरागों से रौशन करना

 

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मेरा यही खयाल है गो मैने पी नहीं,
कोई हसीं पिलाए तो यह शै बुरी नहीं।

-'रियाज' खैराबादी


1.शै - चीज
 

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मेरी निगाह में वह रिन्द रिन्द नहीं साकी,
जो होशियारी और मस्ती में इम्तियाज करे।

-'इकबाल'


1.रिन्द – शराबी 2.इम्तियाज - फर्क, अन्तर

 

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