शेर-ओ-शायरी

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मेरे दिल में तड़प है पीने की,
तेरे हाथों में जाम है साकी।

-'असर' अजमेरी
 

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मैं मैकदे की राह से होकर निकल गया,
वरना सफर हयात का काफी तवील था।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. मैकदा - शराबखाना 2.हयात - जिन्दगी 3. तवील- लंबा

 

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मैं समझता हूँ तेरी इशवागिरी को साकी,
काम करती है नजर, नाम पैमाने का है।

-'जलील' मानिकपुरी


1.इशवागिरी - जादूगरी
 

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मैं हादिसों से जाम लड़ाता चला गया,
हंसता-हंसाता, पीता-पिलाता चला गया।
वो रफ्ता-रफ्ता जाम पिलाते चले गए,
मैं रफ्ता-रफ्ता होश में आता चला गया।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.रफ्ता-रफ्ता - धीरे-धीरे

 

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