शेर-ओ-शायरी

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यह किसने कह दिया गुमराह कर देता है मैखाना,
खुदा की फजल से इसके लिए मंदिर हैं
मस्जिद हैं।  

-अर्श मल्सियानी


1.मैखाना- शराबखाना 2.फजल- मेहरबानी, कृपा
 

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यह गवारा न किया दिल ने कि मांगू तो मिले,
वरना साकी को पिलाने से इन्कार न था।

-'साकिब' लखनवी

 

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यह मौसम और इस मौसम में तौबा,
जनाबे-शैख आप क्या फरमा रहे हैं।

-'सोहन लाल 'साहिर'


1.तौबा – परहेज 2.जनाबे-शैख - धर्मोपदेशकजी
 

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यारों खता मुआफ मेरी मैं नशे में हूँ,
सागर में मय है, मय में नशा है, मैं नशे में हूँ।

-मीरतकी 'मीर'


1.सागर - पियाला 2.मय - शराब

 

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