शेर-ओ-शायरी

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वह कौन है जिन्हें तौबा की मिल गई फुर्सत,
हमें गुनाह भी करने को जिन्दगी कम है।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.तौबा - परहेज

 

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वह चीज जिसके लिये हमको हो बहिशत अजीज,
सिवाय  बादा-ए-गुलफामे- मुश्कबू क्या हैं?

-मिर्जा 'गालिब'


1.बहिशत - स्वर्ग

2.बाद-ए-गुलफामे-मुश्कबू - फूल के रंग और कस्तुरी जैसी खुशबू वाली शराब

 

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वह तो कहिए रास्ते में मिल गए कुछ मैकदे,
जिन्दगी का यह सफर वरना बहुत दुश्वार था।

-'नूर' पन्नालाल
 

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शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए,
यह मुस्कराती हुई चीज मुस्करा के पिला।
सरूर चीज के मिकदार में नहीं मौकूफ,
शराब कम है साकी तो नजर मिला के पिला।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.शिकन - सलवट 2. जबीं - माथा 3. सरूर - नशा

4. मिकदार - मात्रा 5. मौकूफ - निर्भर, आधारित


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