शेर-ओ-शायरी

<< Previous   मैकशी (Drinking) Next >> 

शैख की दावत में मय का काम क्या,
एहतियातन कुछ मंगा ली जाएगी।

-'अकबर' इलाहाबादी


1.शैख - धर्मोपदेशक, महात्मा 2. मय - शराब


साकिया तिश्नगी की ताब नहीं,
जहर दे दे अगर शराब नहीं।

-'दाग'


1.तिश्नगी - प्यास 2.ताब - सहन-शक्ति, शक्ति, सामर्थ्य

 

*****

साकी मेरे खुलूश की शिद्दत तो देखना,
फिर आ गया हूँ गर्दिशे-दौरां को टालकर।

अब्दुल हमीद 'अदम'


1.खुलूश - मुहब्बत, प्यार 2.शिद्दत - प्रगाढ़ता

3.गर्दिशे-दौरां - रोज-रोज के गम
 

*****


साकी तेरी नजर की क्या सियाहकारियां हैं,
मयख्वार होश में है जाहिद बहक रहे हैं।

-महेश चन्द्र 'नक्श'


1.सियाहकारियां - जादूगरी 2.मयख्वार - शराबी

3. जाहिद - संयम, नियम और जप-तप करने वाला ,विषयविरक्त


*****

 

     << Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21  Next >>