शेर-ओ-शायरी

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आप के लिए गुनाह ही सही,
मैं पीऊं तो सवाब बनता है।
सौ गमों को निचोड़ने के बाद,
एक कतरा शराब बनती है।
-'साहिर' होशियारपुरी


1.सवाब - पुण्य
 

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'आरजू' जाम लो, झिझक कैसी,
पी ली और दहशते-गुनाह गई।

-'आरजू' लखनवी

 

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एक ही दोस्त और उससे भी छुड़वाते हो,
नासेहों अब तुम्हें दुश्मन कहें, या दोस्त बताओ।

-'ख्वाजा' हाली


1.नासेह- शराब न पीने की नसीहत देने वाला

 

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ऐ हजरते-नासेह, हमें इल्जाम न दीजे,
इस उम्र में कुछ आप भी नादान रहे हैं।

-'कतील' शिफाई

 

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