शेर-ओ-शायरी

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हमसे सागर  न छीन ऐ जाहिद,
इस इनायत से कहर बेहतर है।
हश्र तक जिसको पीके गम झेलें,
उस अमृत से जहर बेहतर है।

-'साहिर' होशियारपुरी


1.सागर – पियाला

2.जाहिद - संयम, नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति, ऋषि
 

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हमारी जिन्दगी का हुस्न मैखाने में है साकी,
यहीं आकर यह दीवानी हसीं मालूम होती है।

-नरेश कुमार 'शाद'

 

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हुजूमे-गम मेरे हमराह था जब मैकदे पहुंचा,
मगर एक बेखुदी हमराह थी जब लौट कर आए।

-बशीर 'बद्र'

 

1.बेखुदी-बेखबरी,बेसुधी
 

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हमें पीने से मतलब है जगह की कैद क्या 'बेखुद'
उसी का नाम काबा रख दिया, बोतल जहा रख दी।

-'बेखुद' देहलवी
 

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हर तमन्ना गुनाह बन जाए,
हर नफस सर्द आह बन जाए।
मयकदे का वुजूद न हो अगर,
जिन्दगी खानकाह बन जाए।

-नरेश कुमार 'शाद'

1.नफस - सांस 2.मयकदा - शराबखाना
3.वुजूद- अस्तित्व 4.
खानकाह - फकीरों और साधुओं के रहने का स्थान, आश्रम

 

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