शेर-ओ-शायरी

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गो मय है तुन्दो-तल्ख पै साकी है दिलरूबा,
ऐ शैख बन पड़ेगी न कुछ हां कहे बगैर।

-'ख्वाजा' हाली


1.मय - शराब 2.तुन्दो-तल्ख - तेज और कड़वी

3.दिलरूबा -दिल को उचक ले जाने वाला, माशूक 4.शैख - पीर, गुरू, धर्माचार्य,

 

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गो हाथ को जुम्बिश नहीं, आंखों में तो दम है,
रहने दो अभी सागरो-मीना मेरे आगे।

-मिर्जा 'गालिब'


1.जुम्बिश - हरकत 2. सागरो-मीना - प्याला और सुराही

 

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जमाने की रफ्तार से तंग आकर,
'अदम' कर लिया मैकदे में बसेरा।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. मैकदा - शराबखाना

 

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जर्फ वालों के यहां तो गैर भी पी जाते हैं,
तिश्नगी रह जाती है कमजर्फ के मैखाने में।


1.जर्फ – उदारदिल, फराखदिल, 2.तिश्नगी - प्यास, पिपासा

3. कमजर्फ - तंगदिल, अनुदार, तंगनजर, ओछा
 

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