शेर-ओ-शायरी

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जाहिद शराब पीने से काफिर हुआ मैं क्यों,
क्या डेढ चुल्लू पानी में ईमान बह गया।

-अब्राहम जौंक


1.जाहिद - संयम, नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति

 

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जिन्दगी की दराज पलकों पर, रास्ते का गुबार छाया है।
आबे-कौसर से आंख धो ले, मैकदा फिर करीब आया है।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.दराज - लम्बी, तवील 2. गुबार - धूल

3. आबे-कौसर -स्वर्ग के कुंड या हौज का पानी

 

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जुल्मतों से न डर कि रस्ते में,
रौशनी है शराबखाने की।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.जुल्मत - अन्धेरा

 

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डूबती सांस को उभारा है, नब्ज गिरती हुई संभाली है,
मय को सागर में डालकर साकी,जान में तूने जान डाली है।

-नरेश कुमार 'शाद'


1.मय – शराब 2.सागर - प्याला

 

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