शेर-ओ-शायरी

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तेरे जमाल को आराइशों से क्या मतलब,
भला बहारे-मुजस्सिम में क्या बहार आये
उस एक शब के सहारे गुजर रही है हयात
वह एक शब जो तेरी महफिल में गुजार आये।

1.आराइश- जेवर, आभूषण, सिंगार, सजावट 2. बहारे-मुजस्सिम- जो साक्षात् बहार हो 3.शब- रात, निशा, रजनी, रात्रि 4. हयात- जिंदगी

 

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तेरी महफिल में एक सागर का,
मैं भी उम्मीदवार हूँ साकी।


1.सागर - शराब का गिलास, पान-पात्र

 

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दीखावे के हैं सब ये दुनिया के मेले,
भरी बज्म में हम रहे हैं अकेले।
-अफ्सर मेरठी

 

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दुनिया की महफिलों से उकता गया हूँ यारब,
क्या लुत्फ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो।
-मोहम्मद इकबाल


1. अंजुमन- महफिल, बज्म।

 

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