शेर-ओ-शायरी

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आगे खुदा ही जाने अंजामे - इश्क क्या हो,
जब ऐ 'शकील' अपना यह हाल है अभी से।

-शकील बंदायुनी

 

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आज कैसी हवा चली ऐ 'फिराक',
आख बेइख्तियार भर आई।
-फिराक गोरखपुरी


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आज वो मेहरबाँ से लगते हैं,
कोई वादा वफा न हो जाये।

 

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आते-आते आयेगा उनको खयाल,
जाते - जाते बेखयाली जायेगी।
-फैज अहमद 'फैज'


1.बेखयाली - बेखुदी, बेखबरी
 

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