शेर-ओ-शायरी

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बैठे हुए देते हैं वो दामन से हवाएं,
अल्लाह करे हम न कभी होश में आयें।
बेखुद यूँ ही रखेंगी हमें शोख अदायें,
जब सामने हों आप तो क्यों होश में आयें।
-नूह नारवी
 

1बेखुद - बेखबर
 

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भले ही कोई ताजमहल न बनवा सके,
मुमताज तो हर दिल में बसा करती है।


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मंजिल में मुहब्बत की हस्ती ही रूकावट है,
कल बज्म में कहता था जलता हुआ परवाना।
-माहिर-उल-कादिरी


1हस्ती - (i) अस्तित्व, वजूद (ii) जीवन, प्राण (iii) सामर्थ्य, मकदूर

2बज्म - महफिल

 

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मक्तबे - इश्क का 'मोमिन' है निराला दस्तूर,
उसी को छुट्टी न मिली जिसको सबक याद हुआ।
-मोमिन


1.मक्तबे–इश्क - इश्क की पाठशाला या नियम या काइदा
2. सबक - (i) पाठ, शिक्षा, सीख (ii) नसीहत, इब्रत

 

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