शेर-ओ-शायरी

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मजालिम ही सही वाबस्तगी  तो उनसे कायम है,
गनीमत है कि वह हमको किसी काबिल समझते हैं।

   -अहसन मारहरवी

 

1.मजालिम -अत्याचार, ज्यादतियाँ, जुल्म 2.वाबस्तगी-लगाव,

संपर्क, संबंध

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मजाले - तर्के - मुहब्बत न एक बार हुई,
खयाले- तर्के –मुहब्बत तो बार-बार आया।
-वहशत कलकतवी


1मजाले-तर्के–मुहब्बत -मुहब्बत के परित्याग की हिम्मत

 

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मर चुकीं सारी उम्मीदें 'अख्तर',
आरजू है कि जिये जाती है।
-'अख्तर' अंसारी

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मरीजे - इश्क पर रहमत खुदा की,
मरज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की।
-मोमिन


1.रहमत - कृपा, दया, मेहरबानी

 

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