शेर-ओ-शायरी

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मिन्नते-चारासाज कौन करे,
दर्द जब जांनवाज हो जाये।
-फैज अहमद फैज


1.चारासाज - चिकित्सक या इलाज करने वाला (यानी माशूका, प्रेमिका)
2.जांनवाज - प्राणवर्धक, प्राणों में नई जान डालने वाला

 

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मिलना  तेरा अगर  नहीं  आसाँ  तो  सहल,

दुश्वार   तो   यही  है  कि   दुश्वार  भी  नहीं।

इस  सादगी  पै  कौन   मर  जाये    खुदा,

लड़ते  हैं  और हाथ  में  तलवार  भी नहीं।

  -मिर्जा गालिब

 

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मिलने से भी अजीज है मिलने की आरजू

है वस्ल से भी जियादा मजा इन्तिजार में।

 

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मुझको नहीं कुबूल दो आलम की वुसअतें,
किस्मत में कू-ए-यार -की दो गज जमीं सही।
-जिगर मुरादाबादी


1आलम - दुनिया, संसार 2वुसअतें - विशालताएँ

3.कू-ए-यार - प्रेमिका की गली

 

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