शेर-ओ-शायरी

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मुझे सहल हो गईं मंजिलें, वो हवा के रूख भी बदल गये,
तेरा हाथ, हाथ में आ गया कि चराग राह में जल गये।
-मजरूह सुल्तानपुरी
 

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मुद्दतें गुजारीं तेरी याद भी न आई हमें
और हम भूल गये हों तुझे, ऐसा भी नहीं।
-फिराक गोरखपुरी

 

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मुझे गम भी उनका अजीज है,
कि उन्हीं की दी हुई चीज है।

-शकील बदायुनी
 

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मुझे तमाम जमाने की आरजू क्यों हो,
बहुत है मेरे लिये इक आरजू तेरी।

-जलील मानिकपुरी

 

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