शेर-ओ-शायरी

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मुहब्बत हो गई है जिन्दगी से इतनी बेपायां,
कि अब घबरा के मर जाने की गुंजाइश बहुत कम है।

-अब्दुल हमीद अदम


1.बेपायां -जिसका अंत न हो,असीम,बेहद
 

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मेरा    दामन   से   लिपटना   आप   भूल  जायें,

मुझको अब तक आप का दामन छुड़ाना याद है।

    -नख्शब जार्चवी

 

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मेरी जान तुझपै सदके, एहसान इतना कर दो,
मेरी जिन्दगी में अपनी चाहत का रंग भर दो।

-साहिर लुधियानवी

 

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मेरी जानिब से उनके दिल में किस शिकवे पै कीना है,
वह शिकवा जो जबां पर क्या कभी दिल में नहीं आया।
-नातिक लखनवी


1.जानिब - ओर 2.कीना - द्वेष,रंजिश

 

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