शेर-ओ-शायरी

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मेरी जिन्दगी पै न मुस्कुरा, मुझे जिन्दगी का अलम नहीं,
जिसे तेरे गम से हो वास्ता, वो खिजाँ बहार से कम नहीं।
-शकील बदायुनी


1.अलम - रोष, रंजिश, दुःख, क्लेश, तकलीफ

 

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मेरी मुफलिसी से बचकर कहीं और जाने वाले,
ये सकूँ न मिल सकेगा तुझे रेशमी कफन में।

-कतील शीफाई


1.मुफलिसी - गरीबी
 

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मेरे  खुदा  मुझे  थोड़ी-सी  जिन्दगी  दे  दे,
उदास  मेरे जनाजे  से जा  रहा है  कोई।

 
  -कमर
 
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मेरे ख्वाबों के झरोखों को सजाने वाली,
तेरे ख्वाबों में कहीं मेरा गुजर है कि नहीं।

-साहिर लुधियानवी

 

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