शेर-ओ-शायरी

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मेरे सकूते - यास पै इतना न हो मलूल,
मुझको, खुदा न ख्वास्ता, तुमसे गिला नहीं।
-फिराक गोरखपुरी


1.सकूते - यास - निराशा से उत्पन्न खामोशी 2. मलूल - उदास, खिन्न, दुखी 3. खुदा न ख्वास्ता - खुदा न करे, ईश्वर ऐसा न करे

 

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मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहे जिसे वक्त,
मैं गया वक्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ।
-मिर्जा गालिब

 

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मेहरबानी  को  मुहब्बत  नहीं  कहते ऐ  दोस्त,
आह!  अब  मुझसे रंजिशे -बेजा , भी  नहीं।

    -फिराक गोरखपुरी

1. रंजिशे -बेजा-अनुचित या असंगत शिकायत या नाराजगी

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मैं अब वाकिफ हुआ हूँ, है कमाले-इश्क वो मंजिल,
जहाँ इंसान को महसूस होती है कमी अपनी।
-अलम मुजफ्फरनगरी


1.कमाल-(i)पूर्णता(ii) गुण, खूबी(iii) फन, शिल्प, दस्तकारी (iv) अधिक, बहुत

 

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