शेर-ओ-शायरी

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मौत का इन्तिजार बाकी है,
आप का इन्तिजार था, नहीं रहा।
-फानी बदायुनी
 

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मौत की राह न देखूं कि बिन आए न रहे,
तुमको चाहूँ कि न आओ तो बुलाये न बने।

-मिजा गालिब

 

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मौत के सदके वह बेपर्दा आये लाश पर,
जो न देखा था तमाशा उम्र भर, दिखला दिया।
-मोमिन


1.सदका - सर से कोई चीज खैरात करने के लिए उतारना, दान,
 

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मौत फिर जीस्त न बन जाये, यह डर है'गालिब',
वह मेरी कब्र पर अंगुश्त - बदंदाँ होंगे।
-मिर्जा गालिब


1.जीस्त - जिन्दगी, जीवन 2.अंगुश्त –बदंदाँ- जो अचंभे को कारण दाँतों में उँगली दबाकर रह गया हो, निस्तब्ध, चकित (अर्थात् मेरी मृत्यु पर उन्हें अफसोस होगा और वह मेरी कब्र पर आयेंगे। मुझे डर है कि उसके आने से मृत्यु जीवन न बन जाए और उन्हें मुंह में उँगली देनी पड़े)

 

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