शेर-ओ-शायरी

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यह कह सकते हो हम दिल में नहीं, पर ये बतलाओ,
कि जब दिल में तुम्हीं तुम हो तो आंखों से निहां क्यों हो?
गलत है जज्बा-ए-दिल का शिकवा, देखो जुर्म किसका है,
न खीचो गर तुम अपने को, कशाकश दरमियाँ क्यों हो?

-मिर्जा गालिब


1.निहां - छुपा हुआ 2.जज्बा-ए-दिल - दिल की कशिश (आकर्षण, खिचाव) 3.कशाकश - (i) खींचातानी (ii) असमंजस, संकोच, दुविधा, पसोपेश

 

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यह कहके आखिरे-शब, शम्अ हो गई खामोश,
किसी की जिन्दगी लेने से जिन्दगी न मिली।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.आखिरे-शब - रात के खत्म होने पर, रात के अंतिम पहर मे

 

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यह जन्नत मुबारिक रहे जाहिदों को,
कि मैं आप का सामना चाहता हूँ।
न आते हमें इसमें तकरार क्या थी,
मगर वादा करते हुए आर क्या थी?
-मोहब्बद इकबाल


1. जाहिद - विषय-विरक्त, जितेन्द्रिय, संयमी, जप-तप करने वाला व्यक्ति 2.तकरार - वाद-विवाद, कहासुनी, बहस 3.आर - लज्जा, शर्म

 

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यह  तमन्ना  है  किसी  दर पै    जाऊँ  यारब,

मुझको  जो  कुछ  भी  मिले  तेरे खजाने से मिले।

 

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