शेर-ओ-शायरी

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यह तेरा तसव्वर है कि मेरी तमन्नाएं
दिल में कोई रह-रह के दीपक जलाये है।
-सागर निजामी


1.तसव्वर - (i) ध्यान, विचार, खयाल (ii) कल्पना, तखैव्युल

 

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यह तो नहीं कहता कि इन्साफ ही करो,
झूठी भी तसल्ली हो तो जीता ही रहूँगा।

-सौदा
 

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यह देखकर कि उनको है रंगीनियों का शौक,
आँखों को हमने दीदा-ए-खूंबार कर किया।

-'जोश' मलीहाबादी


1.दीदा-ए-खूंबार - खून बरसाने वाली आँख
 

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यह न थी हमारी किस्मत कि विसाले-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इन्तिजार होता।
तेरे वादे पै जिये हम तो ये जान झूठ जाना,
कि खुशी से मर न जाने अगर एतबार होता।
कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीरे - नीमकश को,
ये खलिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।
कहूँ किससे मैं कि क्या है शबे-गम बुरी बला है,
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एकबार  होता।

-मिर्जा गालिब


1.विसाल - मिलन, संयोग 2.तीरे – नीमकश - वह तीर जो घाव में से आधा खींच कर छोड़ दिया गया हो 3.खलिश - (i) दर्द, चुभन, दर्द की टीस (ii) चिन्ता, फिक्र, उलझन 4. शबे-गम - विरह की रात

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