शेर-ओ-शायरी

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यह नया साल नये साल की सूरत आये,
मेरे हिस्से में भी आप की कुछ कुर्बत आये।


1.कुर्बत - सामीप्य, नजदीकी


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यह फकत आप की इनायत है,

वरना मैं क्या, मेरी हकीकत क्या?

 

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यह बाजी इश्क की बाजी है जो चाहे लगा दो डर कैसा,
गर जीत गये तो कहना क्या, हारे भी तो बाजी मात नही।
-फैज अहमद फैज
 

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यह बात हमने मुहब्बत की आग में देखी,
भड़कती जाती है जितनी बुझाई जाती है।
-सबा जयपुरी

 

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