शेर-ओ-शायरी

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यह माना किसी काबिल नहीं हूँ इन निगाहों में,
बुरा क्या है अगर इस दिल की वीरानी मुझे दे दो।
-साहिर लुधियानवी
 

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यह माना शीशाए-दिल रौनके-बाजारे-उल्फत है,
मगर जब टूट जाता है तो कीमत और होती है।
-वामिक जौनपुरी
 

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यह सब तस्लीम है मुझको मगर ऐ दावरे-मशहर,
मुहब्बत के सिवा जुर्मे-मुहब्बत की सजा क्या है।

-रविश सिद्दीकी


1.तस्लीम - कुबूल करना, स्वीकार करना

2.दावरे-मशहर - कयामत के दिन इन्साफ करने वाला, ईश्वर
 

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यह सुनके हमने मैखाने में अपना नाम लिखवाया,
जो मैकश लड़खड़ाता है, वह बाजू थाम लेते हैं।

-जोश मलीहाबादी


1.मैखाने - मदिरालय, शराबखाना 2.मैकश - शराबी

 

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