शेर-ओ-शायरी

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यारब! तेरी रहमत से मायूस नहीं ‘फानी’,
लेकिन तेरी रहमत की ताखीर का क्या कहिए।
-फानी बदायुनी


1.रहमत - दया, कृपा 2.ताखीर - देर, विलंब

 

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यूँ तो मेरी रगे-जाँ से भी थे नजदीकतर,
आसुंओं के धुंध में लेकिन न पहचाने गये।
-खातिर गजनवी


1.रगे-जाँ - सबसे बड़ी खून की नस जो दिल में जाती है

 2.नजदीकतर - बहुत पास

 

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यूँ मुतमइन आये हैं खाकर जिगर पै चोट,
जैसे वहाँ गये थे इसी मुद्दआ के साथ।

-अर्शमल्सियानी


1.मुतमइन - (i) संतुष्ट (ii) आनन्दपूर्वक, खुशहाल

 

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रफीकों  से रकीब अच्छे हैं जो जलकर नाम लेते हैं,
गुलों से खार बेहतर हैं  जो  दामन  थाम   लेते  हैं।

 

1.रफीक-मित्र, सखा, दोस्त

2.रकीब-किसी स्त्री से प्रेम करने वाले दो व्यक्ति परस्पर रकीब होते हैं

 

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