शेर-ओ-शायरी

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रफ्ता – रफ्ता  जज्बे-कामिल  ने दिखाया यह  असर,
पहले जो मुझमें थी उल्फत, अब वो उनके दिल में है।

 

1.रफ्ता रफ्ता-आहिस्ता-आहिस्ता, धीरे- धीरे
 2.
जज्बे-कामिल-
मुकम्मल कशिश या आकर्षण  3.उल्फत-प्रेम, मोहब्बत
 

*****

 

रफ्ता-रफ्ता ये  हुआ  कैफे -तसव्वर  का असर,

दिल  के  आईने  में,  तस्वीर  उतर  आई  है।

 

1.कैफे-तसव्वर-किसी के खयाल का नशा

 

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रात भर उनका तसव्वर दिल को तड़पाता रहा,
एक नक्शा सामने आता रहा, जाता रहा।

-अख्तर शीरानी


1.तसव्वर - खयाल

 

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रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई.
जैसे विराने में चुपके से बहार आ जाये।
जैसे सहराओं में हौले से चले बादे-नसीम,
जैसे बीमार को बेवजह करार आ जाये।
-फैज अहमद फैज


1.सहरा - (i) जंगल, वन (ii) मरूस्थल, रेगिस्तान
2.बादे-नसीम - शीतल, मंद और सुगंधित समीर 3. करार - चैन, आराम

 

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