शेर-ओ-शायरी

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लाग हो तो हम उसे समझें लगाव,
जब न हो कुछ भी, तो धोखा खायें क्यों।
-मिर्जा गालिब


1.लाग - परिहास, मजाक

 

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लिखा था आपने अपने हाथ से तुमने एक बार,
आज तक हमारे पास है वह यादगार खत।

-हसरत मोहानी
 

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लिखें जो और कुछ वह हमारी मजाल क्या,
इतना ही लिख के भेज दिया, तरस गये।

-मिर्जा दाग

 

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ले गया छीन के कौन, आज तेरा सब्रो-करार,
बेकरारी तुझे ऐ दिल, कभी ऐसी तो न थी।
-जफर
 

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