शेर-ओ-शायरी

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वह आते हैं तो दिल में कुछ कसक मालूम होती है,
मैं डरता हूँ कहीं इसको मुहब्बत तो नहीं कहते।
-अब्दुल हमीद अदम


1.कसक - खिचाव

 

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वह आये हमारे घर खुदा की कुदरत है,
कभी हम उनको, कभी अपने घर को देखते हैं।

-मिर्जा गालिब


1.कुदरत - (i) शक्ति, सामार्थ्य, मक्दूर (ii) प्रकृति,नेचर (iii) दैवी माया

 

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वह आये हैं पशेमान, लाश पर अब,
तुझे ऐ जिन्दगी, लाऊँ कहाँ से मैं।

-मोमिन


1.पशेमान - (i) लज्जित, शर्मिंदा, नादिम (ii) पछताने वाला, पश्चातापी
 

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वह करे भी तो किन अल्फाज में तेरा शिकवा,
जिनको तेरी निगाहे-लुत्फ ने बर्बाद किया।

-जोश मलीहाबादी


1.अल्फाज में- शब्दों में 2.निगाहे-लुत्फ - कृपादृष्टि, मेहरबानियाँ

 

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