शेर-ओ-शायरी

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वह क्या मिला कि दोनों जहान मिल गये हमें,
अब उसकी बारगाह में हम क्या दुआ करें।
-अख्तर शीरानी


1.बारगाह - दरबार, कचहरी

 

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वह जिन्हें याद करके रोता हूँ,
कभी मुझको भी याद करते हैं।
-फिराक गोरखपुरी
 

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वह  तीरहबख्त  हकीकत  में  है  जिसे  'मुल्ला',
किसी  निगाह  के  साए  की  चाँदनी  न  मिली।

-आनन्द नारायण मुल्ला

 

 1.तीरहबख्त-बदकिस्मत, बदनसीब

 

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वह दर्दे-दिल देकर जर्फे-हस्ती आजमाते हैं,
हम इस बारे-गराँ को जिन्दगी कह कर उठाते हैं।

-सागर


1.जर्फे-हस्ती - जीने की शक्ति, जीने की हिम्मत, सहनशीलता

2.बारे-गराँ - भारी बोझ
 

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