शेर-ओ-शायरी

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वह दिल उसके बाद न तारीक हो सका,
जिसमें दिये वह अपनी नजर से जला गये।

-आनन्द नारायण मुल्ला
 

1.तारीक - अंधकारमय, अंधिआरा

 

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वह दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं,
मैं शाद हूँ कि हूँ तो किसी की निगाह में।
-अमीर मीनाई


1.शाद - प्रसन्न, खुश

 

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वह नादिम हुए कत्ल करने के बाद,
मिली जिन्दगी मुझको मरने के बाद।

-'नूह' नारवी
 

1.नादिम - लज्जित, शर्मिन्दा, पछतानेवाला

 

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वह दौलत जिसका दुनिया मसर्रत  नाम  रखा है,

तेरे जलवों के दामाने-नजर  में भीक होती है।

    -अफ्सर मेरठी

 

 1. मसर्रत -आनद, ख़ुशी

2.दामाने-नजर-. नजर के दामन में यानी नजर में

 

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