शेर-ओ-शायरी

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वह शर्मसार तो हैं अपनी बेरूखी के लिये,
यही अदा बहुत है मेरी जिन्दगी के लिये।

-साबिर शाहाबादी
 

1.शर्मसार - लज्जित, शर्मिंदा
 

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वह हजार दुश्मने-जाँ सही मुझे फिर भी गैर अजीज है,
जिसे खाके-पा तेरी छू गई, वह बुरा भी हो तो बुरा नही।

-जिगर मुरादाबादी
 

1.खाके-पा - पांव की धूल

 

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वह हमसे खफा हैं हम उनसे खफा हैं,
मगर बात करने को जी चाहता है।

-शकील बदायुनी
 

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वह हैं कि हर इक बात पै ताजासितम हैं,
हम हैं कि किसी बात का शिकवा नहीं करते।
-फलक देहलवी


1.ताजासितम - हर सांस पर ताजा सितम ढाने वाला

 

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