शेर-ओ-शायरी

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विसाले-दायमी क्या है, शबे-फुर्कत में मर जाना,
कजा क्या है, दिली जज्बात का हद से गुजर जाना।

-अजीज लखनवी


1.विसाले-दायमी - न खत्म होने वाला मिलन

2.शबे-फुर्कत - विरह की रात 3.कजा - मौत 4.जज्बात - भावना
 

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वीरां है मैकदा-खुमो-सागर उदास हैं,
तुम क्या गये कि रूठ गये दिन बहार के।

-फैज अहमद फैज


1.मैकदा - मदिरालय, शराबखाना 2.सागर - मटका और पियाला


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वो फिराक और वो विसाल कहाँ,
वो शबो-रोजो-माहो- साल कहाँ?
थी वो एक शख्स के तुसव्वर से,
अब वो रानाइए-खयाल कहाँ?
-मिर्जा गालिब


1.फिराक - विरह, बिछड़ना, वियोग 2.विसाल - मिलन

3.तुसव्वर - खयाल, तखैयुल

4.रानाइए-खयाल - खयालों की सुन्दरता, हसीन खयाल

 

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शब वही शब है, दिन वही दिन है,
जो तेरी याद में गुजर जाये।
-हसरत मोहानी


1.शब - रात


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