शेर-ओ-शायरी

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शिकवा तो एक छेड़ है लेकिन हकीकतन,
तेरा सितम भी तेरी इनायत से कम नहीं।

-जिगर मुरादाबादी


1.हकीकतन - वाकई, वास्तव में, सचमुच 2.सितम - जुल्म, अत्याचार 3.इनायत - कृपा, मेहरबानी
 

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शुक्र है बाद एक मुद्दत के,
आप की शक्ल तो नजर आई।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


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संगे-दिल को बना दूँ देवता मैं,
आप क्या जाने बंदगी के ढंग।
-यगाना चंगेजी


1.बंदगी -
पूजा, आराधना, इबादत
 

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संभलने दे मुझे ऐ नाउम्मीदी, क्या कयामत है,
कि दामाने-खयाले- यार छुटा जाये है मुझसे।
कयामत है कि होवे मुद्दई का हमसफर 'गालिब'
वो काफिर जो खुदा को भी न, सौंपा जाये है मुझसे।
-मिर्जा गालिब


1.मुद्दई - दावा करने वाला, नालिशी 2. काफिर - बेवफा माशूक

 

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