शेर-ओ-शायरी

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सच है 'निजाम' याद भी उनको न होंगे हम,
पर क्या करें, वह हमसे भुलाया न जाएगा।

-निजाम
 

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सदमा दिया तो सब्र की दौलत भी देगा वह,
किस चीज की कमी है सखी के खजाने में।

-यगाना चंगेजी


1.सखी - दाता, दानी, दानशील, फैयाज


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सदाकत हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज,
हकीकत खुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती।
-जिगर मुरादाबादी


1.सदाकत - सच्चाई 2.वाइज - धर्मोंपदेशक, नसीहत देने वाला 3.हकीकत – यथार्थता, सच्चाई

 

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सब कुछ खुदा से माँग लिया, तुझको माँगकर,
उठते नहीं हैं हाथ, मेरे इस दुआ के बाद।
-आगा हश्र कश्मीरी

 

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