शेर-ओ-शायरी

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साहिल के तलबगार यह पहले से जान लें,
दरिया-ए-मुहब्बत में किनारे नहीं होते।


1.साहिल - तट, किनारा 2.तलबगार - इच्छुक, अभिलाषी, ख्वाहिशमंद


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सिज्दा हो बेखुलूस तो सिज्दा भी है गुनाह,
लग्जिश में हो खुलूस तो लग्जिश नमाज है।


1.सिज्दा - नमाज में जमीन पर सर रखना, ईश्वर के लिए सर झुकाना 2.बेखुलूस - जो सच्चे दिल से न हो 3. लग्जिश - (i) त्रुटि, भूल, गलती (ii) अपराध, कुसूर 4. खुलूस - (i) सत्यता, सच्चाई (ii) निष्कपटता, निष्छलता
 

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 सिज्दों को मेरे आज यह करना है फैसला,
मेरी जबीं  रहे कि तेरा आस्ताँ रहे।

 

         1.सिज्दा - नमाज में जमीन पर सर रखना, ईश्वर के लिए

सर झुकाना 2.जबीं - माथा, भाल, ललाट 3.आस्ताँ  -चौखट,  

                            दहलीज


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      सितम की कामयाबी पर मुबारिकवाद देता हूँ,
         यह उनकी बदगुमानी है कि फरियादी समझते हैं।
-अकबर इलाहाबादी


1.बदगुमानी - गलत खयाल, कुधारणा
2.फरियादी - सहायता के लिए पुकारने वाला, न्याय याचना करने वाला, नालिशी, आर्तनादी, वादी, दावा करने वाला, किसी के अत्याचार की शिकायत करने वाला

 

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