शेर-ओ-शायरी

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सुबह  हुई   और देखी लाशें,लाखों बेकफन  परवानों की।

कोई शम्अ से यह पूछे,यही खातिर है रात के मेहमानों की।

 

1.खातिर  -(i) सम्मान, सत्कार (ii) हृदय, मन, दिल (iii) लिए, वास्ते

 

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सूँघ कर कोई मसल डाले तो यह है गुल की जीस्त
मौत उसके वास्ते डाली पै कुम्हलाने में है।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1. जीस्त - जिन्दगी

 

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'सैफ' क्या चार दिन की रंजिश से
इतने दिनों का प्यार टूट गया।

-सैफुद्दीन सैफ सैफुद्दीन सैफ
 

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सौ बार तेरा दामन हाथों में मेरे आया
जब आंख खुली देखा आपना ही गिरेबाँ है।

-असगर गोण्डवी

 

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