शेर-ओ-शायरी

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सौ बार बंदे - इश्क से आजाद हम हुए
पर क्या करें कि दिल ही अदू है फराग का।

-मिर्जा गालिब


1.अदू - दुश्मन

2.फराग - (i) फुर्सत, छुटकारा, मुक्ति, नजात (ii) सुख, आराम
 

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हजार ऐश की सुबहें निसार हैं जिस पर
मेरी हयात में एक ऐसी भी शामे-गम है।

-मुहम्मद अख्तर

1.ऐश - भोग-विलास 2.हयात - जीवन, जिन्दगी

 

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हजार तर्के-मुहब्बत  का  अहद  करता हूँ

मगर यह  अहद मुकम्मल किया नहीं जाता।

तेरी  जफाओं से है  तल्ख जिन्दगी अपनी

तेरे  बगैर  भी  जालिम  जिया  नहीं जाता।

 

1.तर्के-मुहब्बत - मुहब्बत छोड़ना 2.अहद- प्रतिज्ञा वचन, कौल 3.जफा -ज़ुल्म 4.तल्ख- कड़वा, कटु, आरूचिकर, नागवा

 

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हजार तर्के-वफा करूँ तेरी मुहब्बत का क्या करूँ मैं
दिले-हजीं तुमसे रूठकर भी तेरे इशारों पै चल रहा है।

-शकील बदायुनी]
 

1. तर्क - त्यागना, छोड़ना 2. हजीं - अधम, नीच, कमीना

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