शेर-ओ-शायरी

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हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पै रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।

-मोहम्मद इकबाल


1. दीदावर - पारखी, जौहरी, किसी चीज की अच्छे-बुरे की तमीज करने वाला 2. नर्गिस- एक फूल

 

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हम भी जब्ते-दर्दे-गम करते रहे।
वह भी अपने दिल को समझाते रहे।

-अख्तर हरिचन्


1.जब्ते-दर्दे-गम - (i) प्रेम की व्यथा का इजहार न करना (ii) गम से प्राप्त कष्ट या पीड़ा को बर्दाश्त करना

 

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हम भी दुश्मन तो नहीं है अपने
गैर को तुमसे मुहब्बत ही सही।
अपनी हस्ती ही से हो जो कुछ हो
आगही गर नहीं, गफलत ही सही।
कत्अ कीजे न तअल्लुक हमसे
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही।
हम भी तस्लीम की खू डालेंगे
बेनियाजी तेरी आदत ही सही।

-मिर्जा गालिब


1.आगही - (i) परिचय, पहचान (ii) ज्ञान, जानकारी
2. गफलत - (i) उपेक्षा, बेपर्वाई (ii) बेखबरी 3.कत्अ - त्यागना, पृथक करना, छोड़ना 4.तअल्लुक - संबंध, लगाव, स्वजनता, रिश्तेदारी
5.अदावत - दुश्मनी 6. तस्लीम - (i) कबूल करना, स्वीकार करना
(ii) सलाम करना, प्रणाम करना (iii) आज्ञा का पालन करना, फरमांबरदारी7.खू - आदत 8.बेनियाजी - उपेक्षा, बेपर्वाई
 

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हमको उनसे वफा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफा कया है।
जान तुम पर निसार करता हूँ
मैं नहीं जानता दुआ क्या है।

-मिर्जा गालिब
1.वफा - (i) स्वामी या मित्र के साथ तन,मन,धन से निबाहना और कड़े से कड़े समय पर उसका साथ देना (ii) मुक्ति, वफादारी (iii) निर्वाह, निबाह

 

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