शेर-ओ-शायरी

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हमारी शर्ते-वफा यही  है, वफा  करोगे,  वफा   करेंगे

हमरा  मिलना  तो  ऐसा मिलना मिला करोगे मिला करेंगे।

तुम्हारा कहना कि खत लिखेंगे, यह भी है तुम पर मुनहसिर

हसीन लफ्जों  का  सिलसिला है लिखा करोगे लिखा करेंगे।

तुम्हारे महबूब  हजारों होंगे हमारे  शैदा भी  लाखों  लेकिन

  न तुमको शिकवा, न हमको शिकवा,गिला करोगे,गिला करेंगे।

 

.1.शर्ते-वफा - मुक्ति, वफादारी (ii) स्वामी या मित्र के साथ तन,मन,धन से निबाहना और कड़े से कड़े समय में उसका साथ देना 2.शैदा - आशिक, मुग्ध, मोहित, चाहने वा

 

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हमारे शीशा-ए-दिल को संभलकर हाथ में लेना
नजाकत इसमें इतनी है, नजर से जब गिरा, टूटा।

-काइम


1.शीशा-ए-दिल - जिसका दिल बहुत ही नाजुक हो

2. नजाकत -  मृदुलता

 

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हमें भी देख जो इस दर्द से कुछ होश में आये
अरे दीवाना हो जाना मुहब्बत में तो आसाँ है।

-फिराक गोरखपुरी
 

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हयाते-इश्क है ऐ हमनशीं खामोश जल जाना
मिसाले-शमअ बज्मे-दहर में तू हमको जलने दे।

-दिल शाहजहाँपुरी


1.हयाते-इश्क - इश्क की जिन्दगी 2.हमनशीं - साथ बैठने वाला, दोस्त, मित्र 3.मिसाले-शमअ - शम्अ की तरह

4.बज्मे-दहर - दुनिया की महफिल

 

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