शेर-ओ-शायरी

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हिज्र के बाद अगर वस्ल है तब तो कोई अलम नहीं

रहम है जिसकी इन्तिहा, फिर वह सितम, सितम नहीं।
-शाद अजीमाबादी


1.हिज्र - विरह, वियोग 2.वस्ल - मिलन, विसाल

3. अलम - दुख, तकलीफ, रंज, गम
 

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हिज्र में वस्ल का मजा मिलता है आशिक को

शौक का मर्तबा जब हद से गुजर जाता है।
-आतिश


1.हिज्र - विरह, वियोग

2.मर्तबा - (i) दर्जा, श्रेणी (ii) बार, दफा (iii) प्रतिष्ठा, इज्जत

 

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हुई ताखीर तो कुछ बाइसे-ताखीर भी था

आप आते थे मगर कोई इनागीर भी था।
तुमसे बेजा है मुझे, अपनी तबाही का गिला

इसमें कुछ शाइब-ए-खूबिऐ-तकदीर भी था।
हम थे मरने को खड़े, पास न आया न सही

आखिर उस शोख के तरकश में कोई तीर भी था।
-मिर्जा गालिब


1.ताखीर - विलंब, देर, ढील 2.बाइस - कारण, वजह 3.इनागीर - लगाम पकड़ कर सवार को रोक लेने वाला, आगे बढ़ने से रोकने वाला बाधक, निरोधक 4.बेजा - अनुचित, नामुनासिब 5. शाइब - थोड़ा-बहुत (हाथ)
6.तरकश - तीर रखने का लम्बा खोल जो कमर में लटकाया

जाता है, तूणीर निषंग
 

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हुई ताखीर तो कुछ बाइसे-ताखीर भी था
आप आते थे, मगर कोई इनागीर भी था।

-मिर्जा गालिब


1.ताखीर - देर, विलंब 2.बाइस - कारण 3. इनागीर - लगाम पकड़ कर सवार को रोकने वाला, आगे न बढ़ने देने वाला, निरोधक


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