शेर-ओ-शायरी

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है अजल की इस गलतबख्शी पै हैरानी मुझे
इश्क लाफानी मिला है, जिन्दगी फानी मुझे।

-हफीज जालंधरी


1.अजल - मौत 2.गलतबख्शी - गलती
3.लाफानी - शाश्वत, अमर, कमी खत्म न होने वाला
4.फानी - नश्वर, नाशवान, मिट जाने वाला, न रहने वाला
 

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है बस कि हर एक उनके इशारे में निशाँ और
करते हैं मुहब्बत तो गुजरता है गुमाँ और
यारब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बात।
दे और दिल उसको जो न दे मुझको जुबाँ और
हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'गालिब' का है अन्दाजे-बयाँ और।

-मिर्जा गालिब


1. बस - पर्याप्त, काफी 2.निशाँ - (i) खोज, तलाश (ii) पता, सुराग (iii) चिह्न, अलामत 3.गुमाँ - शंका, शुबह, शक, कुधारणा 4.यारब - मित्रों, दोस्तों
5.सुखनवर - कवि, शायर 6.अन्दाजे-बयाँ - बात करने का ढंग


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हैरत कि गमकदे में खुशी का गुजर कहाँ
तुम आ गये तो रौनके-काशाना हो गया।

-अब्दुल हमीद अदम


1.गमक
दा - गम का घर, जहॉं दुख ही दुख हो

2. रौनके -काशाना - घर की रौनक
 

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हो गया ढेर वहीं आह भी निकली न कोई

जाने क्या बात कहीं, शम्अ ने परवाने से।

 

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