शेर-ओ-शायरी

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इब्तिदा वो थी कि था जीना मुहब्बत में मुहाल,
इन्तिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया।
-जिगर मुरादाबादी


1.इन्तिहा - (i) आखिरी हद, छोर (ii) पराकाष्ठा, चरम सीमा

 

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इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या,
आगे-आगे देखिए होता है क्या।
-मीरतकी मीर


1.इब्तिदा - आरम्भ, शुरू

 

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इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,

कि उन मासूम  आंखों  में  नमी  देखी  नहीं जाती।

 

1.इलाही - हे खुदा 2.अता - प्रदान

 

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इशरते-कतरा है दरिया में फना हो जाना,

दर्द का हद  से गुजरना है  दवा हो  जाना

       -मीर तकी मीर

 

1.इशरते-कतरा - बूँद की खुशी 2.फना - नष्ट, बर्बाद

 

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