शेर-ओ-शायरी

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इश्क  का  जौके-नजारा मुफ्त को बदनाम है,

हुस्न खुद बेताब  है  जलवा दिखाने के लिए।

                  -मजाज लखनवी

 

1.जौके-नजारा - देखने का शौक

 

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इश्क  की  बर्बादियों को  रायगां समझा  था  मैं,

बस्तियाँ निकली, जिन्हे वीरानियाँ  समझा  था मैं।

                     -जिगर मुरादाबादी

1.रायगां - व्यर्थ, बेकार

 

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इश्क क्या चीज है यह पूछिये परवाने से,
जिन्दगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद।

-साहिर लुधियानवी


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इश्क दीवानगी सही लेकिन,
अक्ल पर मेरा एतिकाद नहीं।

-अब्दुल हमीद अदम


1.एतिकाद - विश्वास, यकीन, भरोसा
 

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