शेर-ओ-शायरी

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इश्क पर जोर नहीं, है ये वो आतिश 'गालिब',
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने।

-मिर्जा गालिब


1.आतिश - आग

 

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इश्क में क्या सवाले-खुद्दारी,
जाने कै बार अपनी बात गई।
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.खुद्दारी - स्वाभिमान

 

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इश्क  में ख्वाब का ख्याल किसे,

न लगी आंख जब से आंख लगी।

     -मुहम्मद हयात हसरत

 

1.ख्वाब - (i) नींद, सोने की क्रिया (ii) स्वप्न

 

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इश्क में तबिअत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई और दर्द बेदवा पाया।
-मिर्जा गालिब


1.जीस्त - जीवन, जिन्दगी

 

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