शेर-ओ-शायरी

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इश्क सुनते थे जिसे हम, वह यही है शायद,
खुद-ब-खुद दिल में है इक शख्स समाया जाता।

-ख्वाजा हाली

 

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इश्क से लोग मना करते हैं,
जैसे कुछ इख्तियार है अपना।

-असर लखनवी
 

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इश्क है इक निशाते-बेपायाँ,
शर्त यह है कि आरजू न हो।
-असर लखनवी


1.निशात - आनन्द, खुशी 2.बेपायाँ - जिसका अन्त न हो, असीम, बेहद

 

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इश्के-लामहदूद जब तक रहनुमा होता नहीं,
जिन्दगी से जिन्दगी का हक अदा होता नहीं।

- जिगर मुरादाबादी

1लामहदूद - जिसकी कोई हद न हो, असीमित, बेहद, जो घेरा न

जा सके, जिसकी सीमाएँ निश्चित न हो।2.रहनुमा - पथप्रदर्शक,

रास्ता बताने वाला, आगे-आगे चलने वाला
 

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