शेर-ओ-शायरी

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इस  दर्द-ए-मुहब्बत के अन्दाज निराले हैं,
घटता तो मरज होता,बढ़ता तो दवा होता।

-साकिब लखनवी

 

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इस इज्तिराब पर कुर्बान इक जहाने-सकूँ,
कोई संभाल रहा है और तड़प रहा हूँ मैं।
-दिल शाहजहाँपुरी


1.इज्तिराब- व्याकुलता, बेचैनी, बेताबी, बेकरारी 2. जहाने-सकूँ- सारी दुनिया का सुख-चैन

 

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इस इन्तिहाए-तर्के-मुहब्बत के बावजूद,
हमने लिया है, नाम तुम्हारा कभी-कभी।
-'अर्श' मल्सियानी


1.इन्तिहाए-तर्के-मुहब्बत - मुहब्बत का बिल्कुल परित्याग

 

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इस तरह से तुमने क्यों देखा मुझे,
हर तमन्ना ख्वाब बनकर रह गई।

-सिकन्दर अली 'वज्द'


1.ख्वाब - सपना, स्वप्न
 

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