शेर-ओ-शायरी

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।

-बशीर बद्र

 

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उठ कर तो आ गये हैं तेरी बज्म से मगर,
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं।
-फैज अहमद फैज


1.बज्म - महफिल, अंजुमन

 

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उधर वह बदगुमानी है, इधर यह नातवानी है
न पूछा जाये है उससे, न बोला जाये है हमसे।
-मिर्जा 'गालिब'


1.बदगुमानी -किसी की ओर से बुरा खयाल,कुधारणा

2. नातवानी - शक्तिहीनता, निर्बलता, कमजोरी

 

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उन जफाओं पर भी दिल क्या जाने क्यों गिरवीदा है,
इश्क है इक राज जो आशिक से भी पोशीदा है।

-नातिक लखनवी


1.जफा- जुल्म, अत्याचार 2.गिरवीदा - मोहित, लट्टू, मुग्ध, फरेफ्ता 3.पोशीदा - छुपा हुआ

 

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