शेर-ओ-शायरी

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उनको भी नाजे-फतह हो तो कोई बात है,
हमको तो हर शिकस्त ने मगरूर कर दिया।

-जिगर मुरादाबादी
 

1.नाजे-फतह - जीत का अभिमान या गर्व

2.शिकस्त - हार, पराजय, पराभव 3.मगरूर - अहंकारी, घमंडी

 

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उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है,
कि कुछ मुद्दत हसीं ख्वाबों में खोकर जी लिया मैंने।
-साहिर लुधियानवी
 

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उम्मीद तो बँध जाती, तस्कीन तो हो जाती,

वादा  वफा करते, वादा तो किया होता।

 

      1.तस्कीन -(i) संतोष, इत्मीनान (ii) सान्त्वना, ढाढ़स, दिलासा

                          2.वफा - निर्वाह, निबाह, प्रतिज्ञा पालन

 

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उल्फत का जब मजा है कि वो भी हों बेकरार,
दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई।
-इस्माइल मेरठी

 

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