शेर-ओ-शायरी

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कब मैं कहता हूँ तेरा गुनहगार न था,
लेकिन इतनी तो अकूबत का सजावार न था।

-काइम


1. अकूबत - यातना, पीड़ा, तकलीफ
 

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कभी नेकी भी उसके  जी में गर आ  जाये है मुझसे,

जफाएं करके  अपनी  याद  शर्मा  जाये  है  मुझसे।

 

1.जफाएं - जुल्मोसितम, अत्याचार

 

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कभी यक-ब-यक तवज्जुह,कभी दफ्अतन तगाफुल,
मुझे आजमा रहा है कोई रूख बदल -बदल कर।

-शकील बदायुनी


1.तवज्जुह -(i) किसी की ओर मुंह करना, ध्यान देना, ध्यान (ii) कृपा, दया, मेहरबानी 2.दफ्अतन - अचानक 3.तगाफुल - उपेक्षा,

 ध्यान न देना, बेतवज्जुही, बेपर्वाई


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कयामत है कि होवे मुद्दई का हमसफर 'गालिब',
वह काफिर जो खुदा को भी न सौंपा जाये है हमसे।
-मिर्जा गालिब


1.मुद्दई - दावा करने वाला, नालिशी, वादी, फरियादी

 2. हमसफर - यात्रा का साथी, सहपंथी 3. काफिर - माशूक, महबूबा
 

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