शेर-ओ-शायरी

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करते हैं सिज्दे इसलिए दैरो-हरम में हम,
क्या जानिए वह शोख कहाँ हो कहाँ न हो।
-तसलीम

 

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करने का नहीं कद्र कोई इससे जियादा,
रखता हूँ कलेजे में तेरे तीरे-नजर को।

-बिस्मिल
 

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करूँ तो किससे करूँ दर्दे-इश्क का शिकवा,

कि  यारों जिन्दगी को इस दर्द ने  संवारा है।

 

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करूँ मैं दुश्मनी किससे कोई दुश्मन भी हो अपना,

मुहब्ब्त ने नहीं दिल में जगह छोड़ी अदावत की।

 

             1.अदावत - दुश्मनी, शत्रुता

 

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